नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच खेल के मैदान पर होने वाले मुकाबले हमेशा से ही रोमांचक रहे हैं. लेकिन क्रिकेट के मैदान पर इन दोनों देशों के बीच होने वाले मैचों की बात ही अलग रही है. उस पर भी यदि मैच वर्ल्ड कप में हो रहा हो तो दोनों देशों के खिलाड़ियों से लेकर मैदान के बाहर बैठे खेल प्रेमियों तक की आपसी कशमकश चरम सीमा पर रहती है. ऐसे में सोचिए कि इन दोनों देशों के बीच जब टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के इतिहास का पहला टाई मैच खेला गया होगा तो रोमांच कैसा रहा होगा?

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साल 2007 के टी20 वर्ल्ड कप में 14 सितंबर के ही दिन दक्षिण अफ्रीका में डरबन के मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को सुपर ओवर में पीटा था और साथ ही बरकरार रखा था वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में पाकिस्तान से कभी नहीं हारने का रिकॉर्ड. आइए आपको बताते हैं उस रोमांचक मैच और उसे जीतने के लिए कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की तरफ से अपनाई गई बेहतरीन रणनीति के बारे में.

दोनों टीम पहुंच चुकी थी सुपर-Eight में
भारत और पाकिस्तान, दोनों ही वर्ल्ड कप के सुपर-Eight में पहुंच चुके थे. ऐसे में इस मैच की जीत-हार से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था. लेकिन दोनों ही टीम जानती थी कि उनके देश में क्रिकेट प्रेमियों के लिए वर्ल्ड कप का फाइनल यही मैच होगा. ऐसे में इस मैच में जीतने का मतलब आगे के लिए हौसलों का बुलंद हो जाना था. इस कारण दोनों टीमों से पूरे दम से खेलने की उम्मीद थी.

आसिफ की गेंदबाजी पर ध्वस्त हुई थी टीम इंडिया
पाकिस्तान के कप्तान मिसबाह उल हक (Misbah-Ul-Haq) ने उस मैच में टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी दी. तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ (Mohammad Asif) ने पहले ही ओवर में गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) को अपनी ही गेंद पर लपककर शून्य के स्कोर पर वापस भेज दिया. आसिफ के अगले ओवर की पहली ही गेंद पर उस समय तहलका मच गया, जब विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) गेंद की स्विंग से चूके और उनका ऑफ स्टंप उखड़ गया. 

टीम इंडिया का स्कोर 9 रन पर 2 विकेट हो चुका था. आसिफ यहीं पर नहीं थमे और उन्होंने अपने अगले ओवर में युवराज सिंह (YUvraj Singh) और उससे अगले ओवर में दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) को भी वापस भेज दिया. आसिफ के four ओवर पूरे हो चुके थे. लेकिन उन्होंने 18 रन देकर four विकेट लेते हुए अपना काम कर दिया था. टीम इंडिया का स्कोर 36 रन पर four विकेट हो चुका था.

उथप्पा बने संकटमोचक, धोनी ने दिया साथ
आसिफ की घातक गेंदबाजी के बाद रॉबिन उथप्पा टीम इंडिया के संकटमोचक बने और उन्हें दूसरे छोर पर साथ मिला धोनी का. दोनों ने तेजी से 5 ओवर में ही 46 रन जोड़ दिए. 82 रन के टीम स्कोर पर उथप्पा को सोहेल तनवीर ने आउट कर दिया, लेकिन तब तक वे 39 गेंद में 50 रन बनाकर अपना काम कर चुके थे. धोनी ने फिर इरफान पठान के साथ 29 रन जोड़े. धोनी ने 31 गेंद में 33 रन बनाए, जबकि पठान ने 15 गेंद में 20 रन की पारी खेली. आखिरी ओवरों में अजीत अगरकर ने 9 गेंद में 14 रन जोड़े. आखिर में टीम का स्कोर 9 विकेट पर 141 रन रहा. 

श्रीसंत ने शानदार गेंदबाजी से टाई कराया मैच
पाकिस्तान ने भी एक समय अपने four विकेट महज 47 रन पर खो दिए थे, लेकिन उनके कप्तान मिसबाह ने अकेले दम पर मुकाबला करते हुए पाकिस्तान को जीत के करीब पहुंचा दिया. आखिरी ओवर धोनी ने एस. श्रीसंत को सौंपा. पाक को जीत के लिए 12 रन की जरूरत थी. पहली गेंद पर यासिर अराफात ने 1 रन बनाया. स्ट्राइक अब मिसबाह के पास थी, उन्होंने चौका मारने के बाद अगली गेंद पर 2 रन ले लिए. अगली Three गेंद में 5 रन बचे थे. चौथी गेंद पर मिसबाह ने फिर से चौका मार दिया. दर्शकों के लिए मैच खत्म हो चुका था, लेकिन धोनी के लिए नहीं. 

धोनी ने फील्डिंग में थोड़ा बदलाव किया और फिर श्रीसंत से बात की. अगली गेंद को श्रीसंत ने खाली निकाल दिया. अब रोमांच सिर पर चढ़ चुका था. एक गेंद में एक रन की जरूरत थी. दबाव में आए मिसबाह ने आखिरी गेंद को कवर में मारा और एक रन के लिए दौड़ पड़े. युवराज ने तेजी से गेंद उठाकर श्रीसंत को फेंकी और मिसबाह रन आउट हो चुके थे. पाकिस्तान का स्कोर 7 विकेट पर 141 रन रह गया और इसके साथ ही टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का पहला टाई मैच हो चुका था. मिसबाह ने 35 गेंद में 53 रन बनाए.

पाक मना रहा था जश्न, टीम इंडिया कर रही थी प्रैक्टिस
मैच टाई होने के बाद पाकिस्तान की टीम जश्न मना रही थी. दरअसल उनके कोच सुपर ओवर नियम ही भूल गए थे और पाकिस्तान टीम कम विकेट खोने के आधार पर खुद को विजेता मान रही थी. दूसरी तरफ टीम इंडिया विकेट लगाकर सुपर ओवर फेंकने का अभ्यास कर रही थी. 

आईपीएल (IPL) देखने वाला हर क्रिकेट प्रेमी सुपर ओवर के नियम से तो अच्छी तरह वाकिफ है. लेकिन मैच के टाई होने पर दोनों तरफ के बल्लेबाजों को 1-1 ओवर खेलने की इजाजत देने वाला ये नियम आईपीएल की शुरुआत से पहले ऐसा नहीं था. तब सुपर ओवर में बल्लेबाजी के बजाय खाली स्टंप पर गेंदबाजी कराई जाती थी और ज्यादा विकेट गिराने वाली टीम जीत जाती थी. इसे सुपर ओवर के बजाय ‘बॉल आउट’ कहा जाता था. टीम इंडिया इसी की प्रैक्टिस कर रही थी.

सुपर ओवर में धोनी के दांव ने चौंकाया
अपने अजब निर्णयों के लिए पहली बार धोनी ने इसी सुपर ओवर से दुनिया को चौंकाया था. जहां पाकिस्तान ने शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi), यासिर अराफात (Yasir Arafat), उमर गुल (Umar Gul) जैसे रेगुलर गेंदबाजों को उतारा, वहीं धोनी ने भारत की तरफ से हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) के साथ वीरेंद्र सहवाग व रॉबिन उथप्पा को बॉल आउट में उतारकर  सभी को हैरान कर दिया. लेकिन यही दांव काम कर गया. भारत के लिए तीनों गेंदबाजों ने विकेट गिराए, लेकिन पाकिस्तान के दिग्गज गेंदबाज चूक गए. 

ऐसा रहा था बॉल आउट
पहले सहवाग ने गेंद फेंकी और सीधा विकेट पर निशाना साध दिया. जवाब में पाकिस्तान के यासिर अराफात ने फुलटॉस फेंकी, जो स्टंप के ऊपर से निकल गई. अगली बारी हरभजन की थी. हरभजन की गेंद ने भी स्टंप उखाड़ा और उनका रिएक्शन ऐसा था, मानो फुटबॉल में पेनल्टी पर गोल कर दिया हो. उमर गुल ने छोटे रनअप से सीधी गेंद फेंकने की कोशिश की, लेकिन वह भी चूक गए. स्कोर 2-Zero हो चुका था.

अगले गेंदबाज रॉबिन उथप्पा थे. उन्होंने भी गेंद को सीधा स्टंप पर मारा और अपनी कैप उतारकर झुकते हुए दर्शकों का अपने स्टाइल में अभिवादन किया. पाकिस्तान को अब हर हाल में अगली तीनों गेंद स्टंप पर मारनी थी, लेकिन आफरीदी भी चूक गए और भारत ने 3-Zero से बॉल आउट जीत लिया.

वेंकटेश प्रसाद करा रहे थे रोजान प्रैक्टिस
बॉल आउट में जीतने के राज का खुलासा बाद में उथप्पा ने एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने बताया था कि वर्ल्ड कप की शुरुआत के दौरान ही टीम मीटिंग में बॉल आउट के नियम पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी. इसके बाद रोजाना प्रैक्टिस के दौरान गेंदबाजी कोच वेंकटेश प्रसाद (Venkatesh Prasad) फुटबॉल खेलने की बजाए गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच ‘बॉल आउट’ का ही मुकाबला कराने लगे थे. इसमें मैं, सहवाग और रोहित शर्मा (Rohit Sharma) अकसर सही निशाना लगाते थे. यही प्रैक्टिस पाकिस्तान के खिलाफ काम आ गई.

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