असल में इसकी शुरूआत पिछले साल नवरात्रि से हुई। जब परंपरा अनुसार हमने मां के लिए वर्ष में दो बार नवरात्रि उत्‍सव मनाया। इन 9 दिनों में हमने रेगुलर आयोडीनयुक्त नमक के बजाय रॉक सॉल्‍ट यानी सेन्धा नमक‘  का इस्तेमाल किया। मम्‍मी चीजों को वेस्‍ट करना बिल्‍कुल भी पसंद नहीं करतीं। इसलिए हमारे लिए उस बचे हुए सेंधा नमक के पैकेट को इस्‍तेमाल करना जरूरी था। इसलिए नवरात्रि खत्‍म होने के बाद भी हमने सेंधा नमक का इस्‍तेमाल जारी रखा।

और आखिर में, इस एक छोटे से बदलाव ने मुझे इतने सारे फायदे दिए कि अब मैं रेगुलर नमक की बजाए सेंधा नमक का ही इस्‍तेमाल करने की सिफारिश करती हूं।

क्‍या आप जानना चाहेंगे कि वे क्‍या बदलाव हैं?

नमक के परिवर्तन ने मेरे शरीर में कुछ बेहद सकारात्मक बदलाव किए और यही कारण है कि मैं हर किसी को इस बदलाव की सलाह देती हूं:

इसने मुझे सिंथेटिक रसायनों के उपभोग के परिणामों से बचाया:  

मुझे अपने पारंपरिक पक्ष से जोड़ने के अलावा, नवरात्रि ने मुझे दो महत्वपूर्ण चीजों का एहसास करने में मदद की : पहला, जीवन शैली में बदलाव आपके स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकता है। दूसरा, प्रसंस्कृत और परिष्कृत खाद्य पदार्थों से परहेज करते हुए जब आप प्राकृतिक फूड्स का सेवन करते हैं, तो आप खुद को ज्‍यादा स्वस्थ महसूस करते हैं।

हालांकि नवरात्रि व्रत से पहले ही मैंने परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट, परिष्कृत चीनी और संसाधित भोजन में कटौती शुरू कर दी थी। पर मुझे इसका एहसास नहीं था कि नमक में कटौती किए बिना इन सभी बदलावों का ज्‍यादा फायदा होने वाला नहीं है।

मैं यह इसलिए कह रही हूं क्योंकि, गहन शोध के बाद, मैंने यह पाया कि इन दोनों नमकों की विनिर्माण प्रक्रियाओं के बीच का अंतर वास्तव में हमारे स्वास्थ्य में भी अंतर लाता है।

दोनों नमक उनके पोषण मूल्य में अधिक, कम या समान होते हैं, अर्थात, निर्माण की आगे की प्रक्रिया के से पहले। विनिर्माण प्रक्रिया में नमक में मौजूद प्राकृतिक खनिजों को नष्ट कर दिया जाता है।

इसके अलावा, प्राकृतिक नमक शुद्ध सफेद नहीं है, लेकिन रासायनिक ब्लीचिंग के जरिए रेगुलर सॉल्‍ट को शुद्ध सफेद बना दिया जाता है। असल में यह हमारे सफेदी को शुद्ध मानने वाले विचार को संतुष्‍ट करता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यही हमें नुकसान पहुंचाता है।

यहां बताना जरूरी है कि टेबल नमक 1200 डिग्री फारेनहाइट के उच्च तापमान पर कच्चे तेल के एक परतदार अवशेष को गर्म करके उत्पादित किया जाता है और इस गर्मी के कारण, यह अपने खनिजों को खो देता है।

इसके अतिरिक्त, कई नुकसानदायक सिंथेटिक रसायनों और आयोडीन को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए शामिल किया जाता है। इसके अलावा, हानिकारक एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड जैसे परिरक्षकों के अलावा (यह समय के साथ मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है), और सोडियम एल्‍यूमिनोसिलिकेट (aluminosilicate) या मैग्नीशियम कार्बोनेट (चिपकने से बचाने के लिए) इसे और नुकसानदायक बना देते हैं।

दूसरी तरफ, रॉक सॉल्‍ट  यानी सेंधा नमक  सामान्‍य नमक की तरह संसाधित नहीं होता है।

अब, मैं यहां आपको याद दिलाना चाहती हूं कि आपका शरीर जब इतने सारे रसायनों को जोड़कर तैयार किए गए नमक और फि‍र भोजन को ग्रहण करता है, तो उसके लिए अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बचा पाना कितना मुश्किल हो जाता है।

इससे मुझे अपना वजन कम करने में मदद मिली

टेबल सॉल्‍ट के रूप में इतने सारे रसायनों के सेवन को कम करने के लाभ आपकी कल्‍पना से भी ज्‍यादा हैं। असल में सेंधा नमक पेट के लिए वरदान है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्‍त करता है। और यह पेट में होने वाले कई तरह के संक्रमणों से भी बचाता है।

पाचन के अलावा,  इसने मुझे सूजन को नियंत्रित करने में भी मदद की है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सेंधा नमक में साधारण नमक की तुलना में कम सोडियम होता है। अमेरिकन सोसायटी फॉर क्लिनिकल टेस्‍ट द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सोडियम सेवन में वृद्धि वॉटर रिटेंशन से जुड़ा हुआ है, क्योंकि सोडियम शरीर के प्राकृतिक तरल पदार्थ को बनाए रखने के लिए पानी को खुद होल्‍ड करके रखता है।

टेबल सॉल्‍ट में यह प्रॉपर्टी कम होती है और सूजन का कारण बन सकती है, खासकर यदि आपकी नमक खपत 1 चम्मच से अधिक है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के साथ-साथ चिकित्सा संस्थान (आईओएम) के अनुसार प्रति दिन नमक की खपत के बारे में यह डाटा दिया गया है।

प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ और लाइफस्‍टाइल कोच करिश्मा चावला कहती हैं, “ सूजन को रोकने के लिए सोडियम खपत के संदर्भ में एक कंजर्वेटिव एप्रोच रखना ज्‍यादा बेहतर होता है।” वे एक दिन में नमक की खपत को 1 चम्मच तक सीमित करने की सिफारिश करती हैं।

वे एक्‍स्‍ट्रा नमक का उपयोग का सेवन किए बिना स्वाद को बढ़ाने के लिए अजवायन की पत्ती, अजवायन के फूल, और समुद्री शैवाल जैसी जड़ी-बूटियों को शामिल करने की सलाह देती हैं।

पर यह सच है कि सेंधा नमक के सेवन की शुरूआत करते ही मेरी चीनी और नमकीन की क्रेविंग में कमी आई। यह कोई काल्पनिक लाभ नहीं है, बल्कि सेंधा नमक एक प्रूव्‍ड इंसुलिन उत्तेजक है और चीनी की क्रेविंग को नियंत्रित करने में मदद करता है।

ये सारे लाभ मिलकर मेरा नाप कम करने में मददगार हुए।

मैंने खुद को पहले से ज्‍यादा मजबूत महसूस किया

मैं यह कह सकती हूं, क्योंकि मैं हर बार मौसम बदलने पर बीमार पड़ जाने वालों में से हूं। लेकिन इस साल मैंने अपनी इम्‍युनिटी में वृद्धि देखी है।

इस बारे में चावला समझाती हैं, “सेंधा नमक का उपभोग करना फायदेमंद है क्योंकि इसमें किसी तरह का रसायन शामिल नहीं किया जाता और इसमें खनिजों की मात्रा पर्याप्‍त होती है।”

जिंक, आयरन, मैंगनीज, पोटेशियम, और मैग्नीशियम जैसे जरूरी खनिज सेंधा नमक में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे इम्‍युनिटी मजबूत हुई और मैं मौसमी फ्लू की शिकार नहीं हुई। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस  में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस दावे का समर्थन किया क्योंकि यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जरूरी खनिजों के महत्व पर जोर देता है।

मेरा रक्तचाप नियंत्रण में रहा

अतिरिक्त सोडियम खपत भी रक्तचाप में वृद्धि का कारण है। जिससे हृदय संबंधी समस्‍याओं में बढ़ोतरी होती है। चूंकि सेंधा नमक में सोडियम कम मात्रा में होता है, इसलिए इसने मेरा ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल रखा।

अंत में…
टेबल सॉल्‍ट से आयोडीन की कमी की चिंता न करें, जब तक कि आप थायराइड से ग्रस्‍त न हों। रॉक सॉल्‍ट/सेन्धा नमक पर स्विच करने का प्रयास करें। परिवर्तन एक ही रात में नजर नहीं आता, लेकिन अपने समय के साथ वह निश्चित रूप से नजर आएगा।

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