नई दिल्ली: संत कबीर दास ने कहा था “ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय”… यानी हमेशा मीठा बोलिए, ऐसे बोलिए कि उसमें कोई अहंकार न हो. इससे दूसरों को तो शीतलता या शांति मिलती ही है, आपका मन भी शांत रहता है.

अपने परिवारों में हम बचपन से ही ऐसी ही सीख के साथ बड़े होते हैं. लेकिन लगता है कि आज हमारा समाज संत कबीर की इस सीख को भूलता जा रहा है. किसी का बिना कारण अपमान करना, उसे बात-बात पर नीचा दिखाना ये आजकल हमारे सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है. संत कबीर के नाम पर राजनीति करने वाले तो बहुत हैं लेकिन संत कबीर की ये सीख किसी को याद नहीं.

15वीं शताब्दी में पैदा हुए संत कबीर दास काशी में रहा करते थे. वो एक ऐसे कवि थे जो आम बोलचाल की भाषा में बहुत बड़ी-बड़ी बातें कह जाया करते थे. उनके दोहे आज भी लोगों को जीवन से जुड़े संदेश देते हैं. कबीर दास सही मायने में धर्म निरपेक्ष थे, क्योंकि वो हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों की बुरी बातों के खिलाफ लिखते थे.

संत कबीर दास को छोड़ कबीर सिंह वाली शैली पसंद बनी
पिछले साल एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था- कबीर सिंह. फिल्म में मुख्य भूमिका शाहिद कपूर ने निभाई थी. कबीर सिंह एक मेडिकल स्टूडेंट की कहानी है, जो शराब पीता है और कई लड़कियों के साथ रिश्ते रखता है. फिल्म में आक्रामक आचरण और अभद्र भाषा की भरमार थी. ये एक तरह के इमोशनल वॉयलेंस (Emotional Violence) की कहानी है. ये फिल्म देश में बहुत पसंद की गई थी. फिल्म रिलीज के पहले सप्ताह के भीतर ही 100 करोड़ से अधिक की कमाई करने में सफल रही थी. ये 2019 की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन गई थी.

यही कारण है कि हम पूछ रहे हैं कि क्या हमारा समाज संत कबीर दास को छोड़कर कबीर सिंह वाली शैली को पसंद करने लगा है. सार्वजनिक जीवन के संवाद में आज कबीर सिंह वाली छाप नजर आती है. 

पब्लिसिटी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल
17 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन था. इस अवसर पर उन्हें दुनिया के हर बड़े राष्ट्राध्यक्ष ने शुभकामना संदेश भेजे हैं. लेकिन अपने देश में विपक्ष ने उन्हें अभद्र और अमर्यादित भाषा में संबोधित किया. ऐसी ही बेलगाम Dialogue Supply बॉलीवुड में भी हो रही है. जया बच्चन जैसी कोई नेता संसद में खड़े होकर जब बोलती हैं कि ड्रग्स के खिलाफ बोलने वाले जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं, तो उनकी इस बात में भी कबीर सिंह का स्टाइल साफ देखा जा सकता है.

सिर्फ राजनीति ही क्यों, देश को टुकड़े-टुकड़े करने की बात कहने वाले दिल्ली दंगों के साजिशकर्ताओं की बातें भी उसी कबीर सिंह के जैसी हैं, जिसकी बातों में नफरत ही नफरत दिखाई देती है.

भारत को हमेशा से एक संस्कारी देश कहा जाता है. लेकिन भारत के संस्कारों को क्या हो गया है? अभद्र भाषा अब न्यू नॉर्मल हो गई है. जो जितना अभद्र भाषा बोलता है, उसे उतने ही ज्यादा लोग सुनते हैं. उसे तुरंत पब्लिसिटी मिल जाती है. जो चैनल अभद्र भाषा में खबरें दिखाते हैं उन्हें ज्यादा TRP मिलती है. उनके दर्शकों की संख्या बढ़ जाती है.

भाषाई लक्ष्मण रेखा लांघने के नए कीर्तिमान
सार्वजनिक जीवन में संवाद की एक मर्यादा होती है. लेकिन अब रोज भाषाई लक्ष्मण रेखाएं लांघने के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं. आज हम भाषाई स्तर पर नीचे गिरने के इन्हीं कीर्तिमानों का विश्लेषण करेंगे. संत कबीर से कबीर सिंह के इसी टकराव का विश्लेषण करेंगे.

कांग्रेस ने देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा को लांघ दिया जबकि पहले शायद ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि भारत के किसी प्रधानमंत्री का जन्मदिन किसी इंटरनेशनल इवेंट की तरह मनाया जाए. 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 70वां जन्मदिन कुछ इसी अंदाज में मनाया गया.

इस मौके पर दिनभर उन्हें दुनियाभर से बधाइयां मिलती रहीं. कई बड़े देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए निजी संदेश भेजे. इन संदेशों में शुभकामनाओं के साथ डिप्लोमेसी की बातें थीं.

-सबसे खास रहा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का शुभकामना संदेश जिन्होंने हिंदी में ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा, “मेरे प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी, आपको जन्मदिन की बहुत शुभकामनाएं. मुझे विश्वास है कि आने वाले साल में भारत और आस्ट्रेलिया के संबंध नई ऊंचाईयों पर पहुंचेंगे. आपका दिन मंगलमय हो. जल्दी मिलेंगे.”

चीन से भारत के रिश्तों में तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया और भारत में काफी नजदीकी आई है. भारत ने चीन की विस्तारवादी नीतियों का मुकाबला करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया है जिसे QUAD (क्वाड) कहा जा रहा है. उस दृष्टिकोण से भी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का यह शुभकामना संदेश बहुत महत्वपूर्ण है.

– रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए लिखा कि आपके नेतृत्व में भारत सामाजिक, आर्थिक और टेक्नोलॉजी तीनों क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है.

– ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्विटर पर जन्मदिन की बधाई दी और उनसे जल्द मिलने की इच्छा जताई.

– जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर जन्मदिन की बधाई दी. चिट्ठी में नरेंद्र मोदी के लिए ‘प्रिय नरेंद्र’ का संबोधन प्रयोग किया गया है.

-चिट्ठी में एंजेला मर्केल ने कोरोना वायरस से निपटने में सहयोग की बात लिखी है.

– फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं.

– नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी बधाई का संदेश भेजा. इसमें उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मजबूत बनाने की इच्छा जताई है.

– श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भी जो शुभकामना संदेश भेजा है उसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी को My Good Buddy कहकर संबोधित किया है.

देश में भी आम लोगों ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को अपने-अपने तरीके से सेलिब्रेट किया. कई जगह ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए गए. कई लोगों ने तरह-तरह की कलाकृतियां बनाकर प्रधानमंत्री के 70वें जन्मदिन को यादगार बनाने की कोशिश की.

ओडिशा में पुरी के मशहूर Sand Artist सुदर्शन पटनायक ने समंदर के किनारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 फुट ऊंची कलाकृति बनाकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है.

संदेश नाम के एक व्यक्ति ने पीपल के पत्ते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर बनाकर ट्विटर पर पोस्ट की. प्रधानमंत्री ने उन्हें इस अनोखी कलाकृति के लिए धन्यवाद भी दिया.

सुरजेवाला का ट्वीट
प्रधानमंत्री को मिलने वाला ये सम्मान एक देश के तौर पर हम सभी के लिए गर्व की बात है, लेकिन अपने ही देश में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बधाई देने का जो तरीका निकाला वो हैरान करने वाला है. जन्मदिन एक ऐसा मौका होता है जब हम अपने विरोधियों को भी बधाई देना नहीं भूलते. अगर दुश्मनी ज्यादा हो तो हमारे पास हमेशा यह विकल्प होता है कि हम कुछ न कहें यानी उसके जन्मदिन को अवॉयड कर दें. 

लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके को उन्हें एक नया अपशब्द कहने के लिए चुना. यह अपशब्द कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रयोग किया. सुरजेवाला ने एक कहावत का सहारा लिया, लेकिन प्रधानमंत्री के संदर्भ में यह कहावत भी शोभा नहीं देती. इस ट्वीट में सुरजेवाला किसानों की आय और कोरोना वायरस के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. विपक्ष के नेता के तौर पर ये उनका काम भी है, लेकिन ट्वीट की आखिरी लाइन में उन्होंने जो कुछ लिखा उससे पूरा संदर्भ ही बदल गया. इसे पढ़कर नहीं लगता कि कांग्रेस की चिंता किसानों या कोरोना वायरस को लेकर है, बल्कि वो इसके बहाने देश के प्रधानमंत्री से अपनी कोई निजी नाराजगी निकालना चाहती है.

भारतीय राजनीति के एक और पतन का लक्षण
ये मामला सिर्फ प्रधानमंत्री को गाली देने का नहीं है. दरअसल ये भारतीय राजनीति के एक और पतन का लक्षण है. राजनीति में विरोधियों के बीच कड़वी भाषा का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. लेकिन कम से कम जन्मदिन जैसे मौकों पर ऐसी भाषा पहले कभी प्रयोग नहीं की गई. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आज राजनीति के स्तर को और नीचे गिराया है.

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए जिस कहावत का इस्तेमाल किया है. उसकी सच्चाई दिखाने के लिए हम आपको एक आंकड़ा दिखाना चाहेंगे. यहां जानना जरूरी है कि कांग्रेस का चुनावी प्रदर्शन कैसा रहा है. क्योंकि किसी भी लोकतंत्र में दलों के बीच की लड़ाई राजनीतिक होती है. विरोधी को हराने के लिए चुनाव जीतना होता है.

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटें जीती थीं. ये संख्या इतनी कम थी कि कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल का औपचारिक दर्जा भी नहीं मिल पाया था.

इसके बाद 2019 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन लगभग जस का तस ही रहा. उसने इस चुनाव में मात्र 52 सीटें जीतीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को Twitter, Fb, NaMo App और उनकी Web site जैसे Platforms को मिलाकर पूरी दुनिया से 50 लाख से ज्यादा बधाई संदेश मिले हैं और वो Twitter पर 120 से अधिक संदेशों को जवाब भी दे चुके हैं.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नहीं दी बधाई
यहां ध्यान देने वाली बात है कि दुनिया के बड़े बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी. लेकिन इन राष्ट्र प्रमुखों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम शामिल नहीं है. चीन लगातार LAC पर तनाव कम करने की बात कर रहा है. आज अगर शी जिनपिंग चाहते तो प्रधानमंत्री मोदी को बधाई संदेश भेजकर दोनों देशों के बीच संबंधों की नई शुरुआत कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

इसी वर्ष 15 जून को शी जिनपिंग का जन्मदिन था. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन के राष्ट्रपति को शुभकामनाओं का संदेश नहीं दिया था. आपको याद होगा 15 जून को ही लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच एक बड़ा संघर्ष हुआ था. जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे.

कूटनीतिक ताकत देश का नेतृत्व करने वाले नेता पर निर्भर करती है
किसी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक ताकत उस देश का नेतृत्व करने वाले नेता पर निर्भर करती है. DNA में हमने आपको पहले भी बताया है कि भारत की विदेश नीति बदल रही है. यानी विदेश नीति के मामले में भारत ने अपनी गजराज वाली इमेज को छोड़कर आक्रामक शेर वाली नीति को अपना लिया है और इन बदलावों के केंद्र में खुद प्रधानमंत्री हैं.

– प्रधानमंत्री मोदी हमेशा दूसरे राष्ट्र प्रमुखों या राष्ट्राध्यक्षों के साथ अपने निजी संबंध बनाते हैं. आजकल दो देशों के बीच संबंध कूटनीतिक से ज्यादा निजी हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि सीधे भारत से जुड़ी हुई है.

– मोदी की पहचान करिश्माई नेता की है. इसी कारण आज अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की राय बहुत महत्वपूर्ण मानी जाने लगी है. कोरोना वायरस के बाद भारत ने जिस तरह दुनिया के देशों का नेतृत्व किया, वो भी इसी का नतीजा है.

– मोदी की छवि आज दुनिया के देशों के बीच मध्यस्थता कर सकने वाले नेता की बन चुकी है. हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने का श्रेय मोदी को दिया जाता है.

– दुनिया आज प्रधानमंत्री मोदी को बड़े फैसले लेने वाले नेता के तौर पर देखती है. चीन के खिलाफ कड़ा रुख हो या पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयरस्ट्राइक इन सबसे मोदी की छवि तेज और बड़े फैसले लेने वाले नेता की बनी है.

– मोदी अपने लिए हमेशा बड़े लक्ष्य रखते हैं. उन्होंने धारा 370 हटाने और जीएसटी लागू करने जैसे लक्ष्य रखे और पूरा भी किया. इसी तरह उन्होंने भारत को 5 Trillion Economic system बनाने का लक्ष्य रखा है. जिसके लिए उन्होंने पूरी ताकत लगाई हुई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू
पिछले 6 वर्षों में ज़ी न्यूज़ (Zee Information),ज़ी बिजनेस (Zee Enterprise) और अंतरराष्ट्रीय चैनल विऑन (WION) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने तीन बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया है और इसमें सबसे महत्वपूर्ण है, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित उनके आवास पर जाकर उनसे हुई बातचीत. इस लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के विरोधी उनकी हार की भविष्यवाणियां कर रहे थे.

आज तक रिकॉर्ड किए गए सभी इंटरव्यू में एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने हर मुद्दे पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछे और प्रधानमंत्री ने कभी भी न तो कोई सवाल पूछने से रोका और न ही कभी कोई ऐसा मौका आया जब उन्हें अपने सवालों के जवाब न मिले हों. हालांकि एजेंडा चलाने वाले पत्रकारों ने जन्मदिन के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने के अपने अनुभवों के बारे में बताया है और इसमें कई डिजाइनर पत्रकारों ने अपनी पक्षपातपूर्ण राय भी बताई है. विपक्ष ने प्रधानमंत्री के खिलाफ लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल किया है. 

वर्ष 2018 में ज़ी न्यूज़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक इंटरव्यू किया था. तब प्रधानमंत्री से उनकी असीमित ऊर्जा के बारे में सवाल पूछा गया था. 70 वर्ष की उम्र में भी वो प्रतिदिन 18 घंटे तक देश के लिए काम करते हैं. और देश के युवा चाहें तो प्रधानमंत्री से इस प्रकार लगातार काम करने की प्रेरणा भी ले सकते हैं.

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले ज़ी न्यूज़ ने नरेंद्र मोदी का एक इंटरव्यू किया था. तब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे. वर्ष 2014 के चुनाव में भ्रष्टाचार एक बड़ा चुनावी मुद्दा था और तब नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद को लेकर बड़ी बात कही थी.

पर्दे के हीरो और जनता के असली हीरो पर आजकल देश में बहस चल रही है. वर्ष 2019 में अभिनेता अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ गैर राजनीतिक सवाल पूछे थे प्रधानमंत्री का ये विशेष इंटरव्यू भी काफी खास था.

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