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उत्तराखंडeight घंटे पहले

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  • 2020 में उत्तराखंड के चारों धाम में कुल 3.10 लाख लोग दर्शन करने पहुंचे

बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार को शीतकाल के लिए बंद हो गए। इसके लिए कार्तिक शुक्ल पंचमी को दोपहर 3.35 अभिजीत शुभ मुहूर्त का चुनाव किया गया। कपाट बंद होने के अवसर पर करीब पांच हजार श्रद्धालु बद्री विशाल के दर्शन करने पहुंचे थे। कोरोना के चलते इस साल बद्रीनाथ धाम में करीब 1.45 लाख लोग ही दर्शन कर पाए। जबकि, पिछले साल यहां 12.40 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे थे।

गुरुवार को सुबह 4.30 बजे मंदिर खुल गया था। भगवान को नित्य भोग लगाया गया। 12.30 बजे सायंकालीन आरती शुरू हुई। फिर मां लक्ष्मी पूजन कर दोपहर एक बजे शयन आरती की गई। इसके बाद रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने कपाट बंद की प्रक्रिया शुरू की। माणा गांव से महिला मंडल का बुना गया घी का कंबल भगवान बद्री विशाल को ओढ़ाया गया।

उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के समय करीब 5 हजार श्रद्धालु मौजूद रहे।

उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के समय करीब 5 हजार श्रद्धालु मौजूद रहे।

जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होगी शीतकालीन पूजा

शुक्रवार सुबह 9.30 बजे बद्रीनाथ से उद्धवजी और कुबेरजी की पालकी पांडुकेश्वर पहुंचेगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर होते हुए श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी। रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी धर्माधिकारी वेदपाठियों के साथ रवाना होंगे। 22 नवंबर से नृसिंह मंदिर में शीतकालीन पूजा शुरू हो जाएंगी।

द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर के कपाट भी बंद हुए

द्वितीय केदार मध्ममहेश्वर के कपाट भी गुरुवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर में पुजारी टी. गंगाधर लिंग ने समाधि पूजा की। शीतकाल के लिए यहां से भगवान की पालकी 22 नवंबर को अपने गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंच जाएगी। इसी दिन मध्यमहेश्वर मेला आयोजित होगा।

बद्रीनाथ धाम नर और नारायण पर्वत के बीच में स्थित है।

बद्रीनाथ धाम नर और नारायण पर्वत के बीच में स्थित है।

अब नारद मुनि करेंगे बद्रीनाथ की पूजा

मान्यता है कि बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद नारद जी पूजा करते हैं। यहां लीलाढुंगी नाम की जगह पर नारद जी का मंदिर है। शीतकाल में बद्रीनाथ की पूजा का प्रभार नारदमुनि को सौंप दिया जाता है।

कपाट बंद होने के बाद रावल अपने गांव में रहेंगे

बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी केरल में अपने गांव राघवपुरम पहुंच जाते हैं। वहां रावल नियमित रूप से तीन समय की पूजा और तीर्थ यात्राएं करते हैं। बद्रीनाथ से संबंधित हर आयोजन में रावल पहुंचते हैं।

रावल ईश्वरप्रदास नंबूदरी 2014 से बद्रीनाथ के रावल हैं।

रावल ईश्वरप्रदास नंबूदरी 2014 से बद्रीनाथ के रावल हैं।

कोरोना के चलते इस बार कम पहुंचे श्रद्धालु

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि इस साल राज्य के चारधाम.. बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में दर्शन के लिए करीब 3.25 लाख श्रद्धालु पहुंचे। सर्दी में यहां तापमान शून्य से नीचे पहुंच जाता है। बर्फबारी के चलते यहां तक पहुंचना भी मुश्किल होता है।

डॉ. गौड़ ने बताया कि शीतकालीन पूजा ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में होगी। पंच केदारों में ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को, तृतीय केदार तुंगनाथ जी के कपाट Four नवंबर को, चतुर्थ केदार रूद्रनाथ के कपाट 17 अक्टूबर को बंद कर दिए गए हैं। गंगोत्री धाम के कपाट 5 नवंबर और यमुनोत्री धाम के कपाट 16 नवंबर बंद हो चुके हैं।



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