नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट को अपना टेस्ट डेब्यू किए 88 साल हो चुके हों और इन करीब 9 दशक की क्रिकेट में टीम इंडिया ने पूरी दुनिया में अपना डंका बजाने वाले तमाम क्रिकेटर दिए हों. भले ही भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को ‘क्रिकेट का भगवान’ माना जाता हो और उनके नाम पर इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक बनाने का अनूठा रिकॉर्ड दर्ज है. 

लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय शतक किस क्रिकेटर ने बनाया था? ये क्रिकेटर थे लाला अमरनाथ (Lala Amarnath). अपना जन्मदिन 11 सितंबर को मनाने वाले लाला दुनिया के उन चुनिंदा गेंदबाजों में भी शुमार थे, जो गलत  पैर से गेंदबाजी करते थे. आइए बताते हैं भारतीय क्रिकेट के ‘लाला’ की 109वीं जयंती पर उनके बारे में ऐसी ही कुछ खास बातें.

भारतीय धरती पर था ये पहला टेस्ट मैच
पंजाब के कपूरथला में 11 सितंबर, 1911 को जन्मे लाला अमरनाथ का असली नाम नानिक अमरनाथ भारद्वाज था. उन्होंने 15 दिसंबर, 1933 को बंबई (अब मुंबई) के जिमखाना मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ देश की पहली घरेलू टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट मैच से अपने करियर का डेब्यू किया था. यह भारतीय क्रिकेट टीम का महज दूसरा टेस्ट मैच था. पहले टेस्ट मैच में 1932 में लॉर्डस के ऐतिहासिक मैदान पर टीम इंडिया को इंग्लैंड 158 रन से पीट चुकी थी. इसके बाद भारत अपनी धरती पर पहली बार टेस्ट मैच खेलने उतर रहा था.

लाला ने डेब्यू टेस्ट में ही शतक का बनाया था रिकॉर्ड
इस टेस्ट मैच से लाला अमरनाथ ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी. पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किए गए लाला ने पहली पारी में महज 38 रन बनाए. हालांकि उनका यह स्कोर भी टीम इंडिया के 219 रन के कुल स्कोर में सबसे बड़ी पारी था. इंग्लैंड ने जवाब में अपनी पहली पारी में 438 रन ठोक दिए. बुरी तरह पिछड़ी भारतीय टीम ने दूसरी पारी में भी अपने 2 विकेट महज 21 रन पर खो दिए थे.

 यहां से लाला अमरनाथ ने धुआंधार बल्लेबाजी शुरू की और 118 रन ठोक दिए. यह भारत के लिए किसी भी खिलाड़ी का टेस्ट क्रिकेट में पहला शतक था. साथ ही वे डेब्यू टेस्ट में शतक बनाने वाला पहले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए थे. उन्होंने 67 रन बनाने वाले कप्तान सीके नायडू (CK Nayudu) के साथ तीसरे विकेट के लिए 186 रन भी जोड़े, लेकिन पूरी टीम फिर भी 258 रन ही बना सकी. अंग्रेज टीम ने 40 रन के लक्ष्य को महज 1 विकेट खोकर हासिल कर लिया.

महिला दर्शकों ने की थी लाला पर जेवरों की बारिश
भले ही टीम इंडिया 9 विकेट से टेस्ट मैच हार गई, लेकिन लाला की पारी का जलवा ऐसा था कि दर्शक दीर्घा में हर कोई उनका फैन हो गया था. दर्शकों के लिए यह बड़ी बात थी कि अंग्रेजों के वर्चस्व वाले खेल में एक भारतीय बल्लेबाज ने उनके गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए शतक ठोक दिया था.  यही कारण था कि जब लाला आउट होकर पवेलियन लौट रहे थे तो दर्शकों में बैठी महिलाओं ने उनके ऊपर तोहफे के रूप में अपने पहने हुए सोने-चांदी के जेवर तक निकालकर फेंक दिए थे. 

लाला ने बाद में अपनी ऑटोबॉयोग्राफी में इस मूमेंट के बारे में लिखा था, ‘जब मैं शाम को टीम के होटल पहुंचा था तो मुझसे मिलने के लिए सैकड़ों लोग खड़े थे. मुझे होटल की लॉबी तक पहुंचने में 15 मिनट लग गए. मेरे कमरे के अंदर हजारों बधाई संदेश और फूलों के बुके पड़े थे. इसके अलावा मेरा बिस्तर दर्जन भर से ज्यादा रोलेक्स की घड़ियां और अन्य कई तरह को तोहफों से भरा पड़ा था, जो मेरी पारी के बदले में भेजे गए थे.’

करते थे दाएं पांव से गेंदबाजी, किया था ब्रैडमैन को हिट विकेट
लाला अमरनाथ बल्लेबाज के तौर पर ही नहीं गेंदबाज के तौर पर भी अजब थे. उनकी खासियत थी कि वे दाएं हाथ से मध्यम तेज गति की गेंदबाजी करते हुए दायां ही पांव क्रीज में आगे रखते थे, जबकि किसी भी सामान्य गेंदबाज का हमेशा बायां पैर ही आगे रहता है. इसे क्रिकेट की भाषा में ‘रांग फुट बॉलर्स’ कहा जाता है, जो 100 में से कोई एक ही मिलता है. अपने इसी अजीबोगरीब एक्शन से हैरान करते हुए लाला अमरनाथ ने डॉन ब्रैडमैन जैसे महान बल्लेबाज को भी चौंका दिया था.

ब्रैडमैन अपने करियर में पहली और आखिरी बार हिट विकेट हो गए थे. ये कारनामा लाला ने 1948 में भारतीय टीम के पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर किया था. ब्रैडमैन ने उनके इस अजीब गेंदबाजी स्टाइल और उस पर अपने हिट विकेट होने का जिक्र बाद में कई बार अपने जीवन में किया था.

विवादों से भी रहा नाता, बीच दौरे से वापस लौटने वाले पहले भारतीय
लाला अमरनाथ का अपने करियर के दौरान और उसके बाद भी कई बार विवादों से करीबी नाता रहा. वे पहले भारतीय क्रिकेटर थे, जिन्हें कप्तान से विवाद होने पर विदेशी दौरे से वापस भेजा दिया गया था. दरअसल 1935 के इंग्लैंड दौरे पर फाइनल इलेवन में चयन को लेकर उनका कप्तान महाराजा ऑफ विजयनगर उर्फ विजी के साथ झगड़ा हो गया था. 

इस पर विज्जी ने उन्हें वापस भेज दिया था. हालांकि लाला उस समय भारतीय क्रिकेट पर अपने पैसे की बदौलत जबरदस्त पकड़ रखने वाले महाराजा पटियाला के करीबी माने जाते थे और इसी कारण सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद टीम इंडिया की कप्तानी की जिम्मेदारी उन्हें ही दी गई थी. हालांकि तब तक लाला के करियर के 10 गोल्डन ईयर बर्बाद हो चुके थे.

आजाद भारतीय टीम और देश के पहले टेस्ट सीरीज विजेता कप्तान
1947 में आजादी के बाद चुनी गई भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी लाला अमरनाथ को ही सौंपी गई थी यानी वे आजाद भारतीय टीम के पहले टेस्ट कप्तान थे. इसके अलावा 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी भी लाला ही कर रहे थे. 

इन दोनों बातों ने भी लाला का नाम टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इस तरह दर्ज कर रखा है कि कोई चाहकर भी उसे नहीं मिटा सकता. लाला ने अपने करियर के दौरान 24 टेस्ट मैच में 878 रन बनाए थे और 45 विकेट भी लिए थे. बल्लेबाजी में 118 रन ही उनकी बेस्ट पारी रही, जबकि गेंदबाजी में 96 रन देकर 5 विकेट उनका बेस्ट परफॉर्मेंस रहा.

अमरनाथ परिवार का डंका है भारतीय क्रिकेट इतिहास में
लाला अमरनाथ के बाद उनके बेटे भी भारत के लिए क्रिकेट खेले. इनमें सुरिंदर अमरनाथ तो कुछ ही टेस्ट मैच खेल पाए, लेकिन मोहिंदर अमरनाथ को भारतीय क्रिकेट इतिहास के दिग्गज ऑलराउंडरों में गिना जाता है. मोहिंदर को सबसे ज्यादा चर्चा भारत की वर्ल्ड कप-1983 में सेमीफाइनल व फाइनल में जबरदस्त गेंदबाजी करके खिताब जिताने और वेस्टइंडीज में 400+ रन बनाकर टेस्ट मैच जीतने के भारतीय टीम के अनूठे कारनामे में दिए गए योगदान के लिए होती है. मोहिंदर के नाम पर क्रिकेट में दो बार असामान्य तरीके से आउट होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. एक बार वो ‘हैंडल्ड द बॉल’ आउट हुए, जबकि दूसरी बार उन्हें ‘ऑब्स्ट्रक्शन द फील्ड’ नियम के तहत आउट दिया गया.

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