नई दिल्ली. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए भारत सहित दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन (Lockdown) लागू किया है. इस कारण तमाम दफ्तर से लेकर बच्चों के स्कूल-कॉलेज तक सब बंद है. लोग अपने घर से ही ऑफिस का काम कर रहे हैं, तो वहीं बच्चों के भी अब ऑनलाइन क्लासेज़ शुरू हो गए हैं. ऐसे समय में ज़रूरत के चलते ज़ूम ऐप काफी चर्चा में आ गया है. ऑफिस में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video confrencing) के ज़रिये मीटिंग्स से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक के लिए इस वीडियो ऐप का तेजी से इस्तेमाल बढ़ा. जानकारी के मुताबिक भारत के करीब 20 देशों से 90 हज़ार स्कूल ज़ूम ऐप (zoom app) का इस्तेमाल कर पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि पूरी दुनिया में पॉपुलैरिटी के बीच इससे जुड़े कई सवाल भी खड़े हो गए हैं.

सबसे पहले बता दें कि ज़ूम एक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग प्लैटफॉर्म है और हैकर्स ने इस ऐप को अपना निशाना बना लिया है. साइबर क्रिमनल्स क्लास या कॉलेज सेशन के दौरान हैकिंग के ज़रिये इसपर आपत्तिजनक कंटेंट तक पोस्ट कर सकते हैं. इस तरह की हरकत हैकर्स स्क्रीन शेयरिंग फीचर का इस्तेमाल करके करते हैं और ऐसी एक्टिविटी को ‘zoom bombing’ कहते हैं.

फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि एफबीआई ने कथित ‘ज़ूम बॉम्बिंग’ को लेकर सतर्क किया था, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हैकिंग से जुड़ा था. एफबीआई ने बताया था कि उसके पास ऐसी कई शिकायतें आई है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कोई अनजान व्यक्ति कॉन्फ्रेंस में जुड़ गया या किसी अनजान व्यक्ति ने पॉर्न या हेट फोटोज़ या स्पीच के ज़रिए कॉन्फ्रेंस को बाधित करने की कोशिश की.ये भी पढ़ें: इंडिया में सस्ती कीमत में आएगा OnePlus 8 और OnePlus 8 Pro, कंपनी ने दिया हिंट

वाशिंगटन पोस्ट से मिली जानकारी के मुताबिक, ज़ूम ऐप पर पोस्ट किए गए बच्चों के चेहरे, आवाज़ और निजी जानकारी भी शेयर होने का खतरा है. इस पर खासतौर पर हैकर का अडल्ट कंटेंट पोस्ट करने का खतरा है. उदाहरण के तौर पर ज़रा सोचें कि आपका बच्चा ज़ूम के ज़रिये पढ़ाई कर रहा है और अचानक उसके सामने अडल्ट वीडियो चलने लगे.

डार्क वेब पर बिक रही है निजी जानकारियां
ब्लीडिंग कंप्यूटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 5 लाख से ज्यादा Zoom अकाउंट को डार्क वेब में बेचा जा रहा है. हैरानी की बात ये है कि कई जगहों पर Zoom यूज़र्स का डेटा तो फ्री में ही बेचा जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक Zoom यूज़र्स को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता है कि उनका डेटा बेचा जा रहा है. इनमें यूज़रनेम, पासवर्ड और यूज़र द्वारा दर्ज की कई जानकारियां शामिल हैं.

साइबर सिक्योरिटी फर्म Cyble ने दावा किया है कि इस कंपनी ने 5 लाख से ज्यादा Zoom के यूज़र क्रेडेंशियल यानी लॉगइन डीटेल्स खरीदी हैं. हालांकि इस फर्म ने कहा है कि ये यूज़र्स को अगाह करने के लिए किया गया है. इस फर्म ने कहा है कि ये डेटा 10 पैसे प्रति अकाउंट से कम में खरीदा गया है.

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ऐपल, स्पेस X जैसी कंपनियों ने लगाई रोक
दुनियाभर की बड़ी-बड़ी कंपनी Apple, House X के साथ-साथ NASA ने भी अपने कर्मचारियों को इससे दूर रहने की सलाह दी है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे Apple और उसके कर्मचारी ऑफिस के रोजोना के काम के साथ-साथ कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर भी काम कर रहे होते हैं.

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ऐपल की बैठकों को फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है. ऐपल अपनी योजनााओं को लेकर बहुत गोपनीयता बरती है, क्योंकि उनके प्रोडक्ट की कोई भी जानकारी लीक होने से उनको बड़ा नुकसान होगा. इसीलिए ऐपल लगातार अपने कर्मचारियों को ज़ूम ऐप से बचने की सलाह दे रही है.

स्पेसएक्स ने 28 मार्च को अपने कर्मचारियों को एक मेमो भेजा, जहां यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि कर्मचारियों को ज़ूम ऐप का इस्तेमाल नहीं करना है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेसएक्स ने ज़ूम का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया था, क्योंकि ऐप पर लगातार गोपनीयता और सुरक्षा चिंताओं को लेकर सवाल उठ रहे है.

गूगल ने भी इस्तेमाल करने से मना किया
इसके अलावा दुनिया की बड़ी टेक कंपनी गूगल ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने कर्मचारियों को ज़ूम ऐप का इस्‍तेमाल करने से रोक दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google ने कुछ हफ्ते पहले अपने सभी कर्मचारियों को ये ऐप बैन करने के बारे में एक ईमेल भेजा है. गूगल ने Work From Dwelling के दौरान अपने कर्मचारियों से कहा कि जिस किसी ने भी अपने सिस्टम पर ज़ूम ऐप को इंस्टॉल किया है, जल्‍द ही सॉफ्टवेयर काम नहीं करेगा.

क्या है Zoom App?
सिलिकॉन वैली बेस्ड एक स्टार्टअप का बनाया ये ऐप एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप है, जिसमें एक टाइम पर 50 लोग जोड़े जा सकते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ ज़ूम ही ऐसा ऐप है, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान एक साथ 10 से ज़्यादा लोग ऐड किए जा सकते हैं. यही वजह है कि घर से काम कर रहे बिज़नेस प्रोफेशनल के बीच ये ऐप रातों-रात बेहद पॉपुलर हो गया. अब तक इस ऐप को 50 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और अभी भी ये नंबर बढ़ रहा है.

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इस वीडियो कॉन्फ्रेसिंग प्लैटफॉर्म पर ज़ूम से ज़्यादा फीचर
एक टाइम था जब वीडियो कॉलिंग और कॉन्फ्रेसिंग के लिए लोगों का पसंदीदा प्लैटफॉर्म स्काईप हुआ करता था. लोग ऑफिस के लिए, पर्सनल चैट के लिए इसी का इस्तेमाल करते थे. इसके बाद imo ऐप बहुत फेमस हुआ. इसमें लोग मैसेजिंग के साथ-साथ वीडियो कॉलिंग का इस्तेमाल करते हैं. लॉकडाउन के समय ज़ूम ऐप ने खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन सुरक्षा को लेकर उठते सवालों के चलते इस ऐप को इस्तेमाल करने का खतरा बढ़ गया है. तो हम आपको बता दें कि बाज़ार में एक ऐसा प्लैटफॉर्म भी मौजूद है, जो भले ही बहुत फेमस नहीं है, लेकिन इसके फीचर्स ज़ूम से भी ज़बरदस्त है.

ज़ूम ऐप में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के ज़रिए एक साथ 100 लोग ऐड हो सकते हैं, जिसके लिए टाइम लिमिट 40 मिनट की दी गई है और ये पूरी तरह से फ्री है. वहीं हम ज़ूम के पेड ऐप की बात करें तो इसमें आप 24 घंटे बात कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको हर महीने $14.99 देना होगा.

लेकिन इससे भी बढ़िया फीचर हमें मुफ्त में तो क्या बुराई है, जी हां Freeconfrencecall.कॉम नाम का प्लैटफॉर्म एक साथ 1,000 लोगों को ऐड करने की सहुलियत देता है. इसके लिए 6 घंटे की टाइम लिमिट दी गई है.

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